विपात्र (vipaatr) - Gyan Books
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विपात्र (vipaatr) - Gyan Books
किताब के बारे में: विपात्र गजानन माधव मुक्तिबोध का एक अधूरा किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण आत्मकथात्मक उपन्यास है, जो व्यक्ति और समाज के द्वंद्व, आत्मसंघर्ष और बौद्धिक चेतना को दर्शाता है। इसका नायक एक संवेदनशील, विचारशील, और आत्मविश्लेषी व्यक्ति है जो सामाजिक अन्याय, भ्रष्ट राजनीति और सांस्कृतिक विघटन से जूझता है। उपन्यास में विचारों की जटिलता, आत्मा की छटपटाहट और अस्तित्व की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। विपात्र एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो समय और सत्ता से टकराता है, लेकिन कहीं न कहीं खुद को भी समझने की कोशिश करता है। यह उपन्यास विचारधारा और आत्मबोध का अनूठा दस्तावेज़ है।
Author: जी. एम. मुक्तिबोध (G. M. Muktibodh)
Pages: 110
Edition: 1926
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