आत्मकथा (Atmakatha) - Gyan Books
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आत्मकथा (Atmakatha) - Gyan Books
किताब के बारे में: डॉ राजेंद्र प्रसाद की आत्मकथा उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करती है। इसमें उनके बचपनए शिक्षाए स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी और राष्ट्रपति के रूप में उनके योगदान का विस्तृत वर्णन है। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चंपारण सत्याग्रहए असहयोग आंदोलनए और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बादए वे भारतीय संविधान सभा के सदस्य बने और भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1950 में वे भारत के पहले राष्ट्रपति बने और 1962 तक इस पद पर रहे। उनकी आत्मकथा उनकी सादगीए निष्ठा और राष्ट्रप्रेम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक पाठकों को संघर्षए समर्पण और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती है।
Author: राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad)
Pages: 712
Edition: 1900
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